सनी देओल: घायल, घातक, बॉर्डर और गदर का सफर
सनी देओल: एक अभिनेता नहीं, हमारे दौर की आवाज़ कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनका नाम लेते ही सिर्फ फिल्में याद नहीं आतीं, पूरा समय याद आ जाता है। सनी देओल मेरे लिए ऐसे ही अभिनेता हैं। जब 90 का दशक चल रहा था, तब सिनेमा सिर्फ कहानी नहीं होता था, वह अनुभव होता था। थिएटर में सीटियाँ बजती थीं, डायलॉग पर लोग खड़े हो जाते थे और कुछ चेहरे स्क्रीन से उतरकर यादों में बस जाते थे। सनी देओल उन्हीं चेहरों में से एक हैं। अर्जुन: भीतर जमा गुस्से की शुरुआत अर्जुन में सनी देओल ने एक ऐसे युवक का किरदार निभाया जो हालात से परेशान है लेकिन टूटता नहीं। यह फिल्म उस समय के समाज की बेचैनी को सामने लाती है। बेरोजगारी, सिस्टम की नाकामी और युवा का गुस्सा। अर्जुन का आक्रोश बनावटी नहीं लगता था। यहीं से सनी देओल की वह छवि बनने लगी जिसमें ईमानदार गुस्सा था। घायल: गुस्से को मिली पहचान घायल उनके करियर की निर्णायक फिल्म रही। यह सिर्फ एक्शन फिल्म नहीं थी। यह उस आम आदमी की आवाज़ थी जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है। अदालत वाले दृश्य आज भी याद किए जाते हैं। उनमें उनका संवाद बोलने का अंदाज़ और चेहरे की सख्ती बहुत प्रभाव...