संदेश

80s Cinema लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Namkeen 1982 Review in Hindi: गुलज़ार की संवेदनशील कहानी

चित्र
  नमकीन: कुछ फिल्में खत्म नहीं होतीं, बस चलती रहती हैं 1982 में आई गुलज़ार की फिल्म नमकीन पहली नज़र में बहुत साधारण लगती है। संजीव कुमार, शर्मिला टैगोर, शबाना आज़मी, वहीदा रहमान और किरण वैराले जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म किसी बड़े नाटकीय ढांचे पर नहीं टिकी है। लेकिन जितनी सादगी से यह आगे बढ़ती है, उतनी ही गहराई से भीतर उतरती जाती है। नमकीन मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं है, एक एहसास है जो खत्म होने के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं होता। पहाड़ों में एक छोटा सा घर। एक बूढ़ी माँ और उसकी तीन बेटियाँ। जीवन साधारण है, लेकिन भीतर बहुत कुछ दबा हुआ है। एक पहाड़ी घर की कहानी नमकीन की कहानी एक पहाड़ी गाँव में रहने वाली जुगनी और उसकी तीन बेटियों के इर्द-गिर्द घूमती है। जुगनी का अतीत नौटंकी से जुड़ा रहा है, लेकिन अब वह अपनी बेटियों के साथ सादा जीवन जी रही है। घर की आर्थिक हालत मजबूत नहीं है, इसलिए वे अपने घर में एक ट्रक ड्राइवर गेरुलाल को किराए पर रखती हैं। गेरुलाल धीरे-धीरे उस घर का हिस्सा बन जाता है। बेटियों की अलग-अलग इच्छाएँ, दबे हुए सपने और जुगनी की चिंता कहानी को आगे बढ़ाती है। फिल्म किसी बड़...