Arijit Singh Creative Freedom: फिल्मों से दूरी और इंडिपेंडेंट म्यूजिक की ओर?

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स्टारडम से आगे: अरिजीत सिंह और क्रिएटिव आज़ादी का फैसला


अरिजीत सिंह ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि वे अब फिल्मों के लिए नए गाने रिकॉर्ड नहीं करेंगे और प्लेबैक सिंगिंग से दूरी बना रहे हैं। यह फैसला उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर खुद लिखा है जिसमें उन्होंने साफ किया कि अब वे नए असाइनमेंट स्वीकार नहीं करेंगे और अपने संगीत को नए रूप में जीना चाहते हैं। संगीत से उनका रिश्ता खत्म नहीं होगा, लेकिन उसका स्वरूप बदलेगा।

यह सिर्फ चर्चा नहीं है, बल्कि खुद उनके शब्द हैं। उन्होंने लिखा कि यह एक अद्भुत यात्रा रही है और अब वे अपने संगीत सफर को एक नए मोड़ पर ले जाना चाहते हैं।

अरिजीत सिंह आज सिर्फ एक गायक नहीं हैं, वे हमारी पीढ़ी की भावनाओं की आवाज़ हैं। पिछले दशक में अगर किसी ने हिंदी फिल्म संगीत में सबसे गहरी छाप छोड़ी है, तो वह उनका नाम है। उनके गीतों ने प्यार, दर्द, जुदाई, अपनापन और जोश हर भावना को ऐसी भाषा दी जो सीधे दिल तक पहुंची।

2013 में रिलीज़ हुआ तुम ही हो उनकी पहचान का सबसे बड़ा मोड़ था। यह गीत सिर्फ एक रोमांटिक ट्रैक नहीं था, बल्कि उस समय की प्रेम अभिव्यक्ति का प्रतीक बन गया। उसके बाद चन्ना मेरेया ने दर्द को नई ऊँचाई दी, ऐ दिल है मुश्किल ने टूटन को आवाज़ दी, रब्ता ने रिश्तों की नर्मी दिखाई और केसरिया ने आधुनिक प्रेम को नया रंग दिया।

अरिजीत सिर्फ प्रेम गीतों तक सीमित नहीं रहे। मुस्कुराने में उन्होंने संवेदना दिखाई, ज़ालिमा में रोमांस की गर्माहट दी और ऐ वतन जैसे गीतों में देशभक्ति की भावना को स्वर दिया। हाल ही में फिल्म बॉर्डर 2 के लिए गाया गया उनका गीत भी यही साबित करता है कि वे सिर्फ रोमांटिक आवाज़ नहीं हैं। उस गीत में जिम्मेदारी, भावनात्मक तीव्रता और देश के प्रति समर्पण का भाव था।

उनके गाने सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। शादियों में तुम ही हो बजता है, टूटे दिलों के साथ चन्ना मेरेया गाया जाता है, लंबी ड्राइव पर केसरिया सुनाई देता है। उनकी आवाज़ लोगों की निजी यादों का हिस्सा बन चुकी है।

उनकी यात्रा आसान नहीं थी। 2005 में उन्होंने फेम गुरुकुल में हिस्सा लिया था लेकिन जीत हासिल नहीं की। उसके बाद कई साल पर्दे के पीछे काम किया, सीखा, इंतजार किया। यह सफलता एक दिन में नहीं मिली थी।

अरिजीत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे सिर्फ गायक नहीं हैं, वे संगीत को समझते हैं। शास्त्रीय प्रशिक्षण, वाद्य यंत्रों की जानकारी और प्रोडक्शन की समझ उनकी गायकी को गहराई देती है। वे सिर्फ सुर नहीं लगाते, वे भावनाएँ रचते हैं।

आज वे दुनिया के सबसे ज्यादा सुने जाने वाले भारतीय कलाकारों में शामिल रहे हैं। करोड़ों फॉलोअर्स, अरबों स्ट्रीम्स और लगातार हिट गाने। लेकिन स्टारडम के बावजूद उनका जीवन सादगी भरा है। मुर्शिदाबाद के जियागंज से उनका लगाव बना हुआ है। वहीं उन्होंने हेशेल नाम से एक किफायती भोजनालय शुरू किया जहाँ आम लोगों को सस्ती थाली मिलती है।

अब जब उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि वे फिल्मों से थोड़ा हटकर अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता को प्राथमिकता देना चाहते हैं, तो इसे गिरावट नहीं कहा जाना चाहिए। यह उस कलाकार का निर्णय है जिसने बहुत कुछ हासिल कर लिया है और अब अपने भीतर की आवाज़ को सुनना चाहता है।

फिल्म इंडस्ट्री में कलाकार को अक्सर बाजार की अपेक्षाओं के अनुसार काम करना पड़ता है। इंडिपेंडेंट संगीत में वह अपनी दिशा खुद तय कर सकता है। शायद यही वह मोड़ है जहाँ अरिजीत खुद को नए रूप में तलाशना चाहते हैं।

फिल्में हों या न हों, उनकी आवाज़ रहेगी। तुम ही हो रहेगा, चन्ना मेरेया रहेगा, केसरिया रहेगा और बॉर्डर 2 का गीत भी यादों में गूंजता रहेगा।

कामयाबी बहुत लोग पाते हैं, लेकिन शिखर पर खड़े होकर दिशा बदलने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती।

जाओ अरिजीत।
जी लो अपनी ज़िंदगी।
संगीत वही करो जो दिल कहे।
हम सुनने के लिए हमेशा तैयार हैं।

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